Thursday, January 21, 2016

किसान vs परमात्मा

एक बार एक किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया !
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कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए,
कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी
ओले पड़ जाये!
.
हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल
थोड़ी ख़राब हो जाये!
.
एक दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा, देखिये प्रभु,
आप परमात्मा हैं, लेकिन लगता है आपको खेती
बाड़ी की ज्यादा जानकारी
नहीं है,
.
एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये, जैसा मै
चाहू वैसा मौसम हो,
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फिर आप देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा!
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परमात्मा मुस्कुराये और कहा ठीक है, जैसा तुम
कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं
करूँगा!
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किसान ने गेहूं की फ़सल बोई, जब धूप
चाही, तब धूप मिली, जब पानी
तब पानी !
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तेज धूप, ओले, बाढ़, आंधी तो उसने आने
ही नहीं दी,
.
समय के साथ फसल बढ़ी और किसान की
ख़ुशी भी, क्योंकि ऐसी फसल
तो आज तक नहीं हुई थी !
.
किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को,
कि फ़सल कैसे उगाई जाती हैं,
.
बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान करते
रहे.
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फ़सल काटने का समय भी आया , किसान बड़े गर्व से
फ़सल काटने गया,
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लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा , एकदम से
छाती पर हाथ रख कर बैठ गया!
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गेहूं की एक भी बाली के
अन्दर गेहूं नहीं था, सारी बालियाँ अन्दर
से खाली थी,
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बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा, प्रभु ये क्या
हुआ ?
.
तब परमात्मा बोले,” ये तो होना ही था, तुमने पौधों को
संघर्ष का ज़रा सा भी मौका नहीं दिया .
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ना तेज धूप में उनको तपने दिया , ना आंधी ओलों से
जूझने दिया ,
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उनको किसी प्रकार की चुनौती
का अहसास जरा भी नहीं होने दिया ,
इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए,
.
जब आंधी आती है, तेज बारिश
होती है ओले गिरते हैं तब पोधा अपने बल से
ही खड़ा रहता है,
.
वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से
जो बल पैदा होता है वोही उसे शक्ति देता है ,उर्जा
देता है,
.
उसकी जीवटता को उभारता है.
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सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने ,
हथौड़ी से पिटने,गलने जैसी चुनोतियो से
गुजरना पड़ता है तभी उसकी स्वर्णिम
आभा उभरती है,
.
उसे अनमोल बनाती है !”
.
उसी तरह जिंदगी में भी अगर
संघर्ष ना हो, चुनौती ना हो तो आदमी
खोखला ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण
नहीं आ पाता !
.
ये चुनोतियाँ ही हैं जो आदमी
रूपी तलवार को धार देती हैं, उसे सशक्त
और प्रखर बनाती हैं,
.
अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनोतियाँ तो
स्वीकार करनी ही
पड़ेंगी,
.
अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे.
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अगर जिंदगी में प्रखर बनना है, प्रतिभा
शाली बनना है, तो संघर्ष और चुनोतियो का सामना तो
करना ही पड़ेगा !


जय श्री कृष्णा......

Wednesday, January 13, 2016

पाने का हक उसी को है . . . जो देना जानता है



एक गरीब आदमी ने सदगुरु महाराज से पूछा
: "मैं इतना गरीब क्यों हूँ?तब गुरु महाराज ने कहा :
"तुम गरीब हो क्योंकि तुमने देना नहीं
सीखा." !
गरीब आदमी ने कहा :
"परन्तु मेरे पास तो देने के लिए कुछ भी नहीं है"।
गुरु महाराज  ने कहा :
"तुम्हारा चेहरा: एक मुस्कान दे सकता है.
तुम्हारा मुँह: किसी की प्रशंसा कर सकता है या दूसरों को
सुकून पहुंचाने के लिए दो मीठे बोल बोल सकता है, तुम्हारे हाथ:
किसी ज़रूरतमंद की सहायता कर सकते हैं. . .
और तुम कहते हो तुम्हारे पास देने के लिए कुछ भी
नहीं ? !!
आत्मा की गरीबी ही वास्तविक
गरीबी है.
पाने का हक उसी को है . . .
जो देना जानता है ....!

जय श्री कृष्णा......

Saturday, January 9, 2016

Thoughtfull thought



आसमान में उड़ते पंछी को जब पिंजरे का पंछी देखता है, तो शायद वह उसे अपने पिंजरे की खूबियाँ, पिंजरे के मालिक की लिखी किताबों के विषय में बताता हो और कहता हो कि तू भी आ जा इस पिंजरे में, यहाँ सुख, शान्ति और समृद्धि है। ईश्वर भी यहीं मिलते हैं और मोक्ष भी यहीं मिलेगा...मालिक दो चार नाम रटने के लिए कहते और बस उसी से सारी बाधाएं, दुःख दूर हो जाते है....

 हो सकता है आप लोगों ने भी देखा हो राम नाम जपते या अल्लाह हू अकबर करते तोतों को ?
Did you?

🙏

Radhekrishna...

Thursday, January 7, 2016

human after death



एक बार एक आदमी मर जाता है...

जब उसे इसका एहसास होता है तो वो देखता है की भगवान हाथ में एक सूटकेस लिए उसकी तरफ आ रहें हैं।

भगवान और उस मृत व्यक्ति के बीच वार्तालाप .....

भगवान: चलो बच्चे वापिस जाने का समय हो चूका है।

मृत व्यक्ति: इतनी जल्दी? मेरी तो अभी बहुत सारी योजनाये बाकी थी।

भगवान्: मुझे अफ़सोस है लेकिन अब वापिस जाने का समय हो चूका है।

मृतव्यक्ति: आपके पास उस सूटकेस में क्या है?

भगवान् : तुम्हारा सामान ।

मृतव्यक्ति: मेरा सामान ? आपका मतलब मेरी वस्तुएँ....मेरे कपड़े....मेरा धन..?

भगवान्: वो चीजें कभी भी तुम्हारी नहीं थी बल्कि इस पृथ्वी लोक की थी ।

मृतव्यक्ति: तो क्या इसमें मेरी यादें हैं?

भगवान्: नहीं ! उनका सम्बन्ध तो समय से था।

मृतव्यक्ति: क्या इसमें मेरी योग्यताएं हैं?

भगवान् : नहीं ! उनका सम्बन्ध तो  परिस्थितियों से था।

मृतव्यक्ति: तब क्या मेरे दोस्त और मेरा परिवार ?

भगवान्: नहीं प्यारे बच्चे ! उनका सम्बन्ध तो उस रास्ते से था जिस पर तुमने अपनी यात्रा की थी।

मृतव्यक्ति: तो क्या ये मेरे बच्चे और पत्नी हैं?

भगवान्: नहीं! उनका सम्बन्ध तो तुम्हारे मन से था।

मृत व्यक्ति: तब तो ये मेरा शरीर होना चाहिए ?

भगवान्: नहीं नहीं ! उसका सम्बन्ध तो पृथ्वी की धूल मिटटी से था।

मृतव्यक्ति: तब  जरूर ये मेरी आत्मा होनी चाहिए!

भगवान्: तुम फिर गलत समझ रहे हो मीठे बच्चे ! तुम्हारी आत्मा का सम्बन्ध सिर्फ मुझसे है।

उस मृतव्यक्ति ने आँखों में आंसू भरकर भगवान के हाथों से सूटकेस लिया और उसे  डरते डरते खोला..

खाली.....

अत्यंत निराश.........दुखी होने के कारण आंसू उसके गालो पर लुढकते हुए बहने लगे। उसने भगवान् से पुछा।

मृतव्यक्ति: क्या कभी मेरी अपनी कोई चीज थी ही नहीं?

भगवान्: बिलकुल ठीक! तुम्हारी अपनी कोई चीज नहीं थी।

मृतव्यक्ति: तब...मेरा अपना था क्या?

भगवान: तुम्हारे पल.......
प्रत्येक लम्हा.. प्रत्येक क्षण जो तुमने जिया वो तुम्हारा था।

इसलिए हर पल अच्छा काम करो।
हर क्षण अच्छा सोचो।
और हर लम्हा भगवान् का शुक्रिया अदा करो।

जीवन सिर्फ एक पल है ...


जय श्री कृष्णा......